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19 December 2024 Daily Current Affairs in Hindi Knowledge-Ka-Adda247


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19  दिसंबर 2024  डेली करंट अफेयर्स हिंदी में, जो UPSC, SSC-cgl, CGL-Mains, बैंक PO, और अन्य सभी सरकारी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण हैं।

In this Blog :

  •  "विश्व और भारत से जुड़े प्रमुख घटनाएँ"
  •  "आर्थिक समाचार"
  •  "राष्ट्रीय समाचार"
  •  "अंतरराष्ट्रीय समाचार"
  •  ''खेल से जुड़े समाचार''
  •  ''नियुक्ति''
  •  ''निधन''
  •  ''परीक्षाउपयोगी तथ्य''

 👉भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने मध्यप्रदेश के ग्वालियर में जीएसआई जियोसाइंसेस म्यूज़ियम का उद्घाटन किया, जिसमें पृथ्वी और जीवन के विकास के विभिन्न पहलुओं को दर्शाने वाली दो गैलरी हैं।

म्यूज़ियम की "प्लैनेट अर्थ" गैलरी में ज्वालामुखी, उल्कापिंड और जीवाश्म प्रदर्शित किए गए हैं, जबकि "पृथ्वी पर जीवन का विकास" गैलरी में प्राचीन जीवन, पारिस्थितिकी तंत्र और जीवन के विलुप्त होने की घटनाओं की प्रक्रिया को दिखाया गया है।

तथ्यों के साथ:

  1. जीएसआई (Geological Survey of India): भारत में यह संस्था पृथ्वी विज्ञान और खनिज संसाधनों के अध्ययन के लिए प्रमुख है। यह भारत सरकार के तहत काम करती है और इसकी स्थापना 1851 में हुई थी।

  2. ग्वालियर: ग्वालियर शहर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के लिए प्रसिद्ध है। यह मध्यप्रदेश के एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में जाना जाता है और यहां ग्वालियर किला, सास बहू के मंदिर जैसे ऐतिहासिक स्थल हैं।

  3. वोल्केनिज़्म और उल्कापिंड: ज्वालामुखियों का अध्ययन पृथ्वी के आंतरिक संरचना के बारे में जानकारी प्रदान करता है। उल्कापिंड पृथ्वी पर बाहरी अंतरिक्ष से आए पदार्थ हैं और ये जीवन की उत्पत्ति को समझने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

  4. जीवाश्म विज्ञान: जीवाश्मों का अध्ययन प्राचीन जीवन और उसके विकास की जानकारी प्रदान करता है। इससे हमें पृथ्वी पर जीवन के प्रारंभ और विलुप्त होने की घटनाओं का विश्लेषण करने में मदद मिलती है।

इस म्यूज़ियम का उद्घाटन एक महत्वपूर्ण कदम है जो वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों को पृथ्वी और जीवन के विकास के रहस्यों को समझने में सहायक होगा।

 👉गति शक्ति विश्वविद्यालय, वडोदरा ने 16 दिसंबर 2024 को नई दिल्ली में भारतीय नौसेना के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।

इस MoU का उद्देश्य भारतीय नौसेना के लिए रसद संबंधी शिक्षा, शोध और प्रशिक्षण को बढ़ावा देना है।
इस समझौते पर हस्ताक्षर उप-वाइस एडमिरल दीपक कपूर (लॉजिस्टिक्स नियंत्रक, भारतीय नौसेना) और प्रोफेसर मनोज चौधरी (उपकुलपति, गति शक्ति विश्वविद्यालय) द्वारा किए गए। यह समझौता भारतीय नौसेना की रसद क्षमता और परिचालन क्षमता को मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।
MoU के तहत, विशेषज्ञता और केस स्टडीज़ का आदान-प्रदान होगा, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के अनुप्रयोग, पूर्वानुमान विश्लेषण और ब्लॉकचेन तकनीकी जैसी क्षेत्रों में रसद प्रथाओं को सुधारने के उद्देश्य से किया जाएगा।

तथ्यों के साथ:

  1. गति शक्ति विश्वविद्यालय: यह विश्वविद्यालय भारतीय सरकार की 'गति शक्ति योजना' के तहत स्थापित किया गया है, जो बुनियादी ढांचे और रसद प्रणाली के विकास को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है।
  2. भारतीय नौसेना: भारतीय नौसेना दुनिया की प्रमुख नौसैनिक शक्तियों में से एक है, और इसे अपनी रसद प्रणाली में सुधार की लगातार आवश्यकता रहती है ताकि इसका संचालन अधिक प्रभावी और कुशल हो सके।
  3. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और ब्लॉकचेन: AI और ब्लॉकचेन जैसे आधुनिक तकनीकी उपकरणों का उपयोग रसद प्रक्रिया को स्वचालित और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए किया जा सकता है, जिससे भारतीय नौसेना की आपूर्ति श्रृंखला और रणनीतिक संचालन में सुधार होगा।
  4. पूर्वानुमान विश्लेषण: रसद संचालन में भविष्यवाणी विश्लेषण का उपयोग यह सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है कि आवश्यक आपूर्ति समय पर और बिना किसी समस्या के उपलब्ध हो।

यह समझौता भारतीय नौसेना के संचालन को अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिससे उसे आधुनिक तकनीकों का लाभ मिल सकेगा।

 👉केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान, प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन, डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत के पहले कीटनाशक प्रतिरोधी बॉडीसूट, 'किसान कवच' का शुभारंभ किया। यह बॉडीसूट किसानों को कीटनाशकों के संपर्क से होने वाले हानिकारक प्रभावों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

यह बॉडीसूट सेपियो हेल्थ प्राइवेट लिमिटेड और BRIC-InStem द्वारा विकसित किया गया है, जो उन्नत कपड़ा प्रौद्योगिकी का उपयोग करता है ताकि यह कीटनाशकों को निष्क्रिय कर सके और किसानों को श्वसन विकार, दृष्टिहीनता और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से सुरक्षा प्रदान कर सके।
इस बॉडीसूट की कीमत ₹4,000 है, यह धोने योग्य और पुनः उपयोग योग्य है, और इसकी जीवनकाल एक साल तक है, जो किसानों की दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए एक सतत समाधान प्रदान करता है।

तथ्यों के साथ:

  1. कीटनाशक प्रतिरोधी बॉडीसूट:
    इस बॉडीसूट का उद्देश्य किसानों को कीटनाशकों से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं से बचाना है। भारत में कृषि कार्य में कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग होता है, जो श्वसन, त्वचा, आंखों और अन्य अंगों से संबंधित समस्याएं उत्पन्न कर सकता है। इस बॉडीसूट के उपयोग से किसानों को इन खतरों से सुरक्षा मिल सकेगी।

  2. किसान और कीटनाशक:
    भारतीय किसानों के लिए कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। भारतीय कृषि मंत्रालय के अनुसार, लगभग 60% किसान कीटनाशकों के सीधे संपर्क में आते हैं, जो दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं। इसके चलते श्वसन विकार, त्वचा एलर्जी, आंखों में जलन और अन्य समस्याएं आम हो गई हैं।

  3. टेक्नोलॉजी का योगदान:
    'किसान कवच' में उपयोग की जाने वाली उन्नत कपड़ा तकनीक कीटनाशकों को न केवल अवशोषित करती है, बल्कि उन्हें निष्क्रिय भी कर देती है। इसका उद्देश्य किसानों को शारीरिक संपर्क से बचाकर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यह प्रौद्योगिकी कीटनाशकों के प्रभाव को कम करने में मदद करती है, जिससे स्वास्थ्य समस्याएं कम होती हैं।

  4. सतत समाधान:
    ₹4,000 की कीमत पर उपलब्ध यह बॉडीसूट धोने योग्य और पुनः उपयोग योग्य है, और इसका जीवनकाल एक साल तक होता है। यह किसानों के लिए एक किफायती और पर्यावरण के अनुकूल समाधान प्रदान करता है, जो लंबे समय तक उनकी सुरक्षा को सुनिश्चित करता है।

यह बॉडीसूट किसानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण नवाचार है, जो कृषि क्षेत्र में स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने का प्रयास करता है और कृषि कार्य को अधिक सुरक्षित बनाता है।

 👉भारत ने स्मार्टफोन के वैश्विक निर्यात में तीसरी सबसे बड़ी स्थिति प्राप्त कर ली है, जो 2019 में 23वें स्थान से उछलकर नवंबर 2024 तक ₹20,000 करोड़ से अधिक के निर्यात के साथ इस महत्वपूर्ण मील के पत्थर तक पहुंचा है।

यह उपलब्धि प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना के उद्देश्य के साथ मेल खाती है, जिसका लक्ष्य FY 2024-25 के लिए उत्पादन मूल्य का 70-75% निर्यात करना है। यह भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण क्षेत्र में सफलता को दर्शाता है।

तथ्यों के साथ:

  1. स्मार्टफोन निर्यात वृद्धि: भारत ने स्मार्टफोन के निर्यात में जबरदस्त वृद्धि की है। 2019 में 23वें स्थान से 2024 में तीसरे स्थान पर पहुंचने का यह सफर भारत के विनिर्माण क्षेत्र के सुधार और विदेशी बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मकता को दर्शाता है।

  2. PLI योजना का प्रभाव: प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना, जो 2020 में शुरू की गई थी, ने इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्टफोन निर्माण को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई। इसके तहत कंपनियों को उत्पादन पर आधारित प्रोत्साहन मिलते हैं, जिससे घरेलू उत्पादन बढ़ा और निर्यात में भी वृद्धि हुई।

  3. वैश्विक स्मार्टफोन बाजार: भारत का स्मार्टफोन निर्यात मुख्य रूप से दक्षिण एशिया, मध्य पूर्व और यूरोप जैसे क्षेत्रों में बढ़ा है, जिससे यह भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग की अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति को मजबूत करता है।

  4. आर्थिक प्रभाव: स्मार्टफोन निर्यात में वृद्धि से भारतीय अर्थव्यवस्था को महत्वपूर्ण लाभ हुआ है। यह रोजगार सृजन, विदेशी मुद्रा में वृद्धि और भारत को एक प्रमुख वैश्विक विनिर्माण हब के रूप में स्थापित करने में मदद करता है।

भारत का यह कदम इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।

 👉रिया शिरीष टेटे ने 16 दिसंबर 2024 को अपना पहला वरिष्ठ राष्ट्रीय खिताब जीत लिया, जब उन्होंने 67वें राष्ट्रीय शूटिंग चैंपियनशिप प्रतियोगिता के महिला 25 मीटर पिस्टल फाइनल में शानदार प्रदर्शन किया। यह प्रतियोगिता डॉ. करणी सिंह शूटिंग रेंज में आयोजित की गई थी।

रिया ने पंजाब की सिमरनप्रीत कौर ब्रार को 7-2 से शूट-ऑफ में हराकर स्वर्ण पदक जीता।

तथ्यों के साथ:

  1. रिया शिरीष टेटे: रिया एक उभरती हुई भारतीय शूटिंग स्टार हैं, जो विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी कड़ी मेहनत और तकनीकी कौशल के लिए जानी जाती हैं। उनका यह पहला वरिष्ठ राष्ट्रीय खिताब उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर और भी पहचान दिलाएगा।

  2. 25 मीटर पिस्टल इवेंट: यह इवेंट महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण श्रेणी है, जिसमें सटीकता, ध्यान और मानसिक स्थिरता की आवश्यकता होती है। रिया का स्वर्ण पदक जीतना इस श्रेणी में उनके उत्कृष्ट कौशल और रणनीतिक तैयारी का संकेत है।

  3. शूट-ऑफ: शूट-ऑफ उस स्थिति को कहते हैं जब दो प्रतियोगियों के स्कोर समान होते हैं, और विजेता का निर्णय एक अतिरिक्त शूट के आधार पर किया जाता है। रिया ने सिमरनप्रीत कौर ब्रार को शूट-ऑफ में 7-2 से हराकर स्वर्ण पदक जीता।

  4. राष्ट्रीय शूटिंग चैंपियनशिप: यह भारत की सबसे प्रतिष्ठित शूटिंग प्रतियोगिताओं में से एक है, जिसमें देश भर के शीर्ष शूटर भाग लेते हैं। इस प्रतियोगिता का आयोजन डॉ. करणी सिंह शूटिंग रेंज, नई दिल्ली में किया गया, जो भारत के प्रमुख शूटिंग रेंजों में से एक है।

रिया की यह जीत भारतीय शूटिंग स्पोर्ट्स में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, और उनके भविष्य में और भी बड़ी उपलब्धियों की उम्मीद जताई जा रही है।

 👉38वें राष्ट्रीय खेल 28 जनवरी से 14 फरवरी 2025 तक उत्तराखंड में आयोजित होंगे।

इन खेलों में कुल 38 खेल होंगे, जिनमें 34 प्रतिस्पर्धात्मक और 4 प्रदर्शनी इवेंट्स शामिल होंगे। खेलों के आधिकारिक शुभंकर का नाम "मौली" रखा गया है, जो उत्तराखंड के राज्य पक्षी मोनाल से प्रेरित है।

तथ्यों के साथ:

  1. 38वें राष्ट्रीय खेल: यह भारत के सबसे बड़े खेल आयोजनों में से एक है, जो हर चार साल में आयोजित किया जाता है। इसमें विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खिलाड़ी भाग लेते हैं, और इसमें देशभर के उत्कृष्ट एथलीटों के प्रदर्शन का प्रदर्शन होता है।

  2. खेलों में शामिल खेल: इस बार के राष्ट्रीय खेलों में कुल 38 खेलों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें प्रतिस्पर्धात्मक खेलों के अलावा प्रदर्शनी खेल भी होंगे। प्रतिस्पर्धात्मक खेलों में विभिन्न एथलेटिक, टीम और इंडिविजुअल खेल शामिल होंगे, जबकि प्रदर्शनी खेलों का उद्देश्य भारतीय खेलों की विविधता और सांस्कृतिक धरोहर को प्रदर्शित करना है।

  3. "मौली" शुभंकर: मोनाल, उत्तराखंड का राज्य पक्षी, एक रंग-बिरंगे और आकर्षक पक्षी के रूप में पहचाना जाता है। "मौली" शुभंकर के रूप में मोनाल की छवि को अपनाया गया है, जो उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता और जीवंतता का प्रतीक है। यह शुभंकर खेलों में राज्य की सांस्कृतिक पहचान और खेल भावना को दर्शाएगा।

  4. उत्तराखंड में आयोजन: उत्तराखंड में यह खेल पहली बार आयोजित हो रहे हैं, और राज्य की सुंदरता, पर्वतीय वातावरण और खेल बुनियादी ढांचे को प्रदर्शित करने का एक बेहतरीन अवसर है। यह आयोजन राज्य में खेलों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और स्थानीय खिलाड़ियों के लिए एक मंच प्रदान करने में सहायक होगा।

यह राष्ट्रीय खेल भारतीय खेल जगत के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है, और उत्तराखंड के लिए गर्व का पल है, जहां देशभर के खिलाड़ी एक साथ प्रतिस्पर्धा करेंगे और राज्य की खेल संस्कृति को एक नई ऊँचाई तक पहुंचाएंगे।

 👉14 दिसंबर 2024 को, चक्रवात 'चिदो' ने हिंद महासागर क्षेत्र में स्थित फ्रांसीसी द्वीप मईotte को तबाह कर दिया, जिससे क्षेत्र में व्यापक तबाही मच गई।

यह चक्रवात एक ऐसी आंधी के रूप में आया, जिसमें हवाओं की गति 200 किलोमीटर प्रति घंटे (124 मील प्रति घंटे) तक पहुँच गई, और इसने द्वीप के अधिकांश गरीब निवासियों को प्रभावित किया।
चक्रवात 'चिदो' ने दक्षिण-पश्चिमी हिंद महासागर के माध्यम से अपना रास्ता जारी रखा, और इसके प्रभाव ने कोमोरोस और मदागास्कर जैसे नजदीकी द्वीपों को भी प्रभावित किया।

तथ्यों के साथ:

  1. चक्रवात 'चिदो': 'चिदो' एक अत्यधिक शक्तिशाली चक्रवात था, जिसे भारतीय महासागर में उत्पन्न होने वाला एक प्रमुख तूफान माना जा रहा है। यह चक्रवात मईotte के गरीब इलाकों में भारी विनाश का कारण बना, जहां ज्यादातर इन्फ्रास्ट्रक्चर कमजोर था और लोग पहले से ही आपदाओं के प्रति संवेदनशील थे।

  2. मईotte: मईotte एक फ्रांसीसी उपनिवेशित द्वीप है, जो हिंद महासागर में स्थित है। यह द्वीप देश की बाहरी भूमि के रूप में प्रसिद्ध है और फ्रांस का एक हिस्सा है, लेकिन यहां के अधिकांश निवासी गरीब हैं और प्राकृतिक आपदाओं के प्रति बेहद संवेदनशील हैं।

  3. चक्रवात की तीव्रता: चक्रवात 'चिदो' ने बहुत उच्च हवाओं के साथ भारी बारिश भी लाई, जिससे बाढ़, जमीन धंसने और मकानों की छतें उड़ने जैसी घटनाएँ सामने आईं। इसके चलते हजारों लोग विस्थापित हो गए और क्षेत्र में बिजली और संचार नेटवर्क प्रभावित हो गए।

  4. प्रभावित क्षेत्र: चक्रवात ने कोमोरोस और मदागास्कर जैसे नजदीकी द्वीपों को भी प्रभावित किया। इन क्षेत्रों में पहले से ही आर्थिक और मानव संसाधन की कमी थी, और ऐसे तूफान से इनका जीवन और कठिन हो गया।

  5. प्राकृतिक आपदाओं का प्रभाव: चक्रवात जैसे प्राकृतिक आपदाएं अक्सर स्थानीय अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से नष्ट कर देती हैं और लोगों की जीविका पर गहरा प्रभाव डालती हैं। मईotte और अन्य प्रभावित द्वीपों में राहत और पुनर्निर्माण कार्य की आवश्यकता होगी, ताकि प्रभावित लोगों को फिर से सामान्य जीवन जीने का अवसर मिल सके।

यह चक्रवात एक गंभीर प्राकृतिक आपदा के रूप में उभरा है, जिससे ना सिर्फ मईotte, बल्कि आसपास के द्वीपों पर भी गहरा असर पड़ा है। इन क्षेत्रों में तत्काल राहत कार्य और पुनर्निर्माण की आवश्यकता है।

 👉प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने "कुम्भ साह'आई'यक" नामक एक बहुभाषी, ए.आई.-संचालित चैटबोट का शुभारंभ किया, जिसे प्रयागराज मेला प्राधिकरण और UPDESCO ने ओला के कृत्रिम ओपन-सोर्स LLM का उपयोग करके विकसित किया है। यह चैटबोट "डिजिटल महाकुंभ" दृष्टिकोण का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य महाकुंभ मेला 2025 (13 जनवरी से 26 फरवरी 2025 तक) के दौरान तीर्थयात्रियों और आगंतुकों को सहायता प्रदान करना है।

यह चैटबोट तीर्थयात्रियों को 11 भाषाओं में, कुछ ही सेकंडों में, जानकारी प्रदान करेगा जैसे कि नेविगेशन, पार्किंग और विश्राम स्थल आदि।

तथ्यों के साथ:

  1. कुम्भ साह'आई'यक चैटबोट: यह चैटबोट विशेष रूप से तीर्थयात्रियों को महाकुंभ मेला के दौरान मार्गदर्शन करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह चैटबोट यूज़र्स को उनकी ज़रूरत की जानकारी आसानी से और तेज़ी से प्रदान करेगा, जैसे कि मेले में प्रवेश, पार्किंग, और विश्राम स्थान।

  2. डिजिटल महाकुंभ: "डिजिटल महाकुंभ" पहल का उद्देश्य कुंभ मेले को तकनीकी दृष्टिकोण से सशक्त बनाना है, ताकि दुनिया भर से आने वाले लाखों तीर्थयात्रियों को सुविधाजनक और सुरक्षित अनुभव मिल सके। इसमें डिजिटल तकनीकों का उपयोग तीर्थयात्रियों की सहायता, सुरक्षा और उनके अनुभव को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा।

  3. ए.आई.-संचालित तकनीकी समाधान: यह चैटबोट ए.आई.-संचालित है, जिसका मतलब है कि यह स्वचालित रूप से और सटीकता से तीर्थयात्रियों के सवालों का जवाब देगा, और विभिन्न भाषाओं में जानकारी प्रदान करेगा, जिससे यात्रियों को भाषा की बाधा नहीं होगी।

  4. बहुभाषी समर्थन: इस चैटबोट की विशेषता यह है कि यह 11 भाषाओं में कार्य करेगा, जिससे भारतीय और विदेशी तीर्थयात्रियों को बिना किसी भाषा समस्या के सहूलियत होगी।

  5. महाकुंभ मेला 2025: महाकुंभ मेला 2025, प्रयागराज में आयोजित होने वाला एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है। यह दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक मेला है, जिसमें लाखों श्रद्धालु आते हैं। डिजिटल समाधानों का उपयोग इस विशाल मेले को व्यवस्थित करने में मदद करेगा और श्रद्धालुओं को अधिक सुविधाएँ प्रदान करेगा।

इस पहल से प्रयागराज महाकुंभ मेला 2025 का अनुभव और भी अधिक समृद्ध और सुगम होगा, और यह भारत की डिजिटल परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

 Sources credited to :

  1.  Press Information Bureau
  2.   The Hindu News Paper
  3.  The Indian Express
  4.  Government ministries official sites

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